कर्म को पूजा मानते थे पं. रामप्रसाद मिश्र:-दुखहरन यादव

संवाददता प्रदीप दुबे

गाजीपुर। स्वामी रामकृष्ण इंटर कालेज जाहीं झोटना के संस्थापक स्व. रामप्रसाद मिश्र को पुण्यतिथि पर विद्यालय परिवार ने गुरुवार को श्रद्धा पूर्वक याद किया। उन्होंने ग्रामीण परिवेश में पलने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के लिए इस संस्था की नींव 15 जुलाई 2005 को रखा था। उनका पूरा जीवन अध्ययन -अध्यापन के लिए समर्पित रहा। उनके विद्यार्थी आज विभिन्न पदों पर सेवा करते हुए सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कुछ कार्यरत भी हैं।वे लोग उनके अध्यापन कौशल की चर्चा प्रायः किया करते हैं। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने ज्ञान दान देकर जो सम्मान अर्जित किया वह आज की पीढ़ी के शिक्षकों के लिए प्रेरणा बन सकता है। एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण उनके अंदर मौजूद थे।ऐसे महापुरुष का स्मरण करके कृतज्ञता ज्ञापित करना समाज का दायित्व बनता है। पं. रामप्रसाद मिश्र से जुड़े संस्मरणों को याद करते हुए शिक्षक नंदलाल शर्मा ने श्रद्धासुमन अर्पित किया। शिक्षक दुखहरन यादव ने कहा कि संस्थापक रामप्रसाद मिश्रा कर्म की महत्ता पर विशेष बल देते थे।पीजी कालेज भुड़कुड़ा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सन्तोष कुमार मिश्र ने कहा कि वह संस्कृत  सुभाषित ‘धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे नारि गृहे द्वार सखा श्मशाने/देहिशचितायां परलोक मार्गे धर्मानुगो गच्छति जीव एकः”और सन्त कवि कबीर दास के पद गाया करते थे। वह मूलतः निर्गुण निराकार की उपासना में विश्वास रखते थे। अपने कर्म को ही पूजा मानते थे। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार मिश्र ने कोविड की गाइडलाइन का पालन करते हुए पुण्यतिथि पर संस्था के संस्थापक और पिता को भावपूर्ण ढंग से याद किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Previous post आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बताएंगी स्तनपान की खूबियां
Next post रिश्वत लेने का आरोपी सिपाही लाइन हाजिर